पादप ऊतक क्या है | ये 2 प्रकार के होते हैं

नमस्कार साथियों आज की इस पोस्ट में हम आपको बताना चाहते हैं कि पादप उत्तक क्या है और ये कितने प्रकार के होते हैं आइए जानते हैं आज की इस पोस्ट में।

ऊतक से अभिप्राय (CONCEPT OF TISSUE)

पादप ऊतक क्या है – ऊतक एक-सी अर्थात् एक समान संरचना अथवा विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं का समूह होता है, जिसके अन्तर्गत सभी कोशिकाएँ आकार, परिमाण, उद्गम/उत्पत्ति (origin) वर्धन (development) एवं विशेष कार्यिकी (क्रियात्मक रूप से) एक समान होती है। ऊतक शब्द का प्रयोग
सर्वप्रथम ग्रू (Grew) ने किया। प्रत्येक ऊतक का एक विशिष्ट कार्य होता है और इस प्रकार सम्पूर्ण शरीर में विभिन्न प्रकार के ऊतक मिल-जुलकर शरीर सम्बंधी सभी कार्य करते हैं।

ये 2 प्रकार के होते हैं (Types of two Tissues)

पादप ऊतक क्या है – ऊतकों को संरचना, विभाजन क्षमता एवं विकास के आधार पर मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित करते हैं- (i) विभज्योतकी ऊतक (Meristematic tissue), (ii) स्थायी ऊतक (Permanent tissue)।

A.विभज्योतकी ऊतक

पादप ऊतक क्या है | ये 2 प्रकार के होते हैं

पादप ऊतक क्या है – विभज्योतक शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम नागेली (Nageli) ने किया। ग्रीक भाषा में मेरिस्टोस का अभिप्राय विभाजित या विभाजनशील (Grdivisible) से है। विभाजित होने वाली कोशिकाओं के समूह विभज्योतक ऊतक(meristematic tissue) कहलाते हैं।

विभज्योतक ऊतक भ्रूणीय कोशिकाओं के समूह हैं और इनमें विभाजन की अभूतपूर्व क्षमता होती है एवं जीवन पर्यन्त बनी रहती है। विभज्योतक ऊतक के विभाजन के फलस्वरूप पौधों में शाखाएँ, पत्तियाँ एवं पुष्प निर्मित होते हैं। विभज्योतकी ऊतक पौधों के वृद्धि करने वाले भागों (growing regions) में विशेषतः स्थित होते हैं। इस ऊतक के विभाजन से पौधा मुख्यतः लम्बाई व मोटाई में वृद्धि करता है।

विभज्योतकी ऊतक का स्थान के आधार पर वर्गीकरण

शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical meristem) : जड़ तथा तनों के अग्र सिरों पर इस प्रकार के विभज्योतकी ऊतक

पाये जाते हैं। ये ऊतक पत्तियों के अग्रों (apices) पर भी सामान्यतः पाए जाते हैं। जड़ एवं तने में लम्बाई में वृद्धि इन

ऊतकों में निरन्तर विभाजन का ही परिणाम होता है। अतः जड़ एवं तनों के सिरों (apices) पर वृद्धि बिंदु (growing

point) इन्हीं ऊतकों द्वारा निर्मित होते हैं, उदाहरण- प्ररोह शीर्ष (shoot apex) एवं मूल शीर्ष (root apex)।

2. अन्तर्विष्ट विभज्योतक (Intercalary meristem) : पादप ऊतक क्या है – अन्तर्विष्ट विभज्योतक वास्तव में अग्रस्थ/शीर्षस्थ विभज्योतक (apical meristem) का ही हिस्सा है, जो शीर्षस्थ विभज्योतक (apical meristem) से जड़ एवं तनों के लम्बाई में वृद्धि करने के कारण पृथक हो जाता है। यह स्थायी ऊतक (permanent tissue) में इसी कारण परिवर्तित नहीं हो पाता है। अन्तर्विष्ट विभज्योतक स्थायी ऊतकों के बीच कहीं-कहीं पर स्थित होता है।

3. पार्श्व विभज्योतक (Lateral meristem) : पार्श्व विभज्योतक जड़ों एवं तनों की पार्श्व दिशाओं (lateral sides) पर स्थित होते हैं। इनकी कोशिकाओं में कोशिका विभाजन केवल अरीय दिशा में (radially) होता है, उदाहरण- पूलीय कैम्बियम (fascicular cambium) एवं कॉर्क कैम्बियम (Cork cambium)।

B.स्थायी ऊतक (Permanent tissue)

ऐसे उतक (tissue) जिनमें विभाजन की क्षमता का ह्रास हो जाता है, स्थायी ऊतक (permanent tissue)कहलाते हैं।

1. साधारण या सरल ऊतक (Simple tissue) : ये ऊतक समान प्रकार की संरचना, आकृति और कार्य वाली कोशिकाओं का समूह होता है अर्थात् सभी कोशिकायें समांगी (homogeneous group) होती हैं। इस ऊतक की सभी कोशिकाएँ उत्पत्ति (origin) में समान होती हैं।

2. जटिल ऊतक (Complex tissue) : इस ऊतक में एक से अधिक प्रकार की आकृतियों एवं कार्यों वाली जीवितहो गयी कोशिकायें होती हैं जो आपस में मिलकर कोई मुख्य कार्य करती हैं।

3. विशिष्ट या स्त्रावी ऊतक (Special or secretory tissues) : इसमें स्रावी कोशिकायें (secretory cells). प्रन्थियाँ (glands) तथा रबरक्षीरी ऊतक (laticiferous tissue) आते हैं। ये ऊतक पौधों में विशेष प्रकार का कार्य जैसे-तेल लेटेक्स, गोंद तथा रेजिन (resin) आदि का स्त्रावण (secretion) पदार्थों का उत्सर्जन (excretion) करते हैं।

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