BRYOPHYTES kya hai | पादप जगत क्या है | प्रमुख लक्षण क्या है | शैवाल का सामान्य परिचय |

पादप जगत क्या है

BRYOPHYTES kya hai | पादप जगत क्या है | प्रमुख लक्षण क्या है | शैवाल का सामान्य परिचय |
  • पादप जगत क्या है पादप जगत यूकैरियोटिक (eukaryotic), प्रकाश-संश्लेषी (photosynthetic) पादप का बड़ा समूह है।
  • पादप जगत के अन्तर्गत तीन प्रकार के पादप सम्मिलित हैं-

(i)  सूक्ष्मदर्शीय पादप (Microscopic plants) : इसके अन्तर्गत क्लैमिडोमोनास एवं वॉल्वाक्स आदि का
अध्ययन करते हैं।
(ii) स्थूलदर्शीय पादप (Macroscopic plants)
(iii) नील-हरित शैवाल पादप (Blue-green algal plants) : इसके अन्तर्गत नॉस्टाक, ऐनाबीना आदि का अध्ययन करते हैं।

पादप जगत क्या है पादपों की कोशिका-भित्ति (cell-wall) दृढ़ एवं निर्जीव पदार्थ सेलूलोस की निर्मित होती है, जिसके भीतर की ओर कोशिकाकला (cell membrane) स्थित होती है। एककेन्द्रीय रसधानी (central vacuole), प्लास्टिड्स (plastids)  में पाई जाती है।

पादपों में ऊतकों का विभेदन (differentiation of tissues) होता है।

पादप जगत में कुछ तंतुक शैवाले, उदाहरण- यूलोथ्रिक्स (Ulothrix) एवं स्पाइरोगाइरा (Spirogyra), विविध प्रकार के स्वच्छजलीय, समुद्री शैवाल, थैलाभ (thalloid) एवं पर्णिल ब्रायोफाइट्स (foliose Bryophytes), फर्न (Ferns), कोनिफर (Conifer) एवं पुष्पीय पौधे (एंजियोस्पर्मस) सम्मिलित हैं।

भूमण्डल पर सभी प्रकार के जलीय आवासों, समुद्री तटों पर उपस्थित प्राथमिक उत्पादक हैं।

पादप जगत में प्रायः अनिश्चित वृद्धि (indefinite growth) पायी जाती हैं। यह वृद्धि विभज्योतकी क्षेत्रों

(meristematic regions) में होती है।

पादप जगत में कुछ पुष्पीय पौधे (flowering plants) परपोषी (heterotrophic) भी होते हैं, ये आंशिक परजीवी (partial parasites) होते है , उदाहरण- विस्कम (Viscum), लोरेन्थस (Loranthus) अथवा (ii) पूर्ण परजीवी (complete parasites), उदाहरण- आरोबैंकी (Orobanche) एवं कस्कुटा (Cuscuta) आदि सम्मिलित हैं।

पादप जगत में कुछ पुष्पीय पौधे (flowering plants) कीटभक्षी (insectivorous) है, ये अपनी नाइट्रोजन की आपूर्ति कीटों के पाचन से करते हैं।

प्रमुख लक्षण क्या है

पादप जगत क्या है सभी पादप जातियों का अध्ययन अलग-अलग सम्भव नहीं है। अध्ययन की सुविधा के लिए इन्हें छोटे-बड़े समूहों (groups) में कुछ लक्षणों की उपस्थिति या अनुपस्थिति, समानताओं (similarities) व असमानताओं (dissimilarities), आकार, अमाप एवं भौगोलिक वितरण के आधार पर संकलित करने को पादप जगत का वर्गीकरण (classification of plant kingdom) कहते हैं। प्रमुख वर्गिकी वैज्ञानिक जी. सिम्पसन (G. Simpson, 1961) ने वर्गीकरण, पद्धति एवं वर्गिकी शब्दों को निम्नवत्
परिभाषित किया-

  • वर्गीकरण (Classification) : जीवों को ग्रुप में क्रम से रखा जाता है। यह वर्गीकी का उपवर्ग है।
  • वर्गिकी (Taxonomy) : जीवों की वर्गिकी की पद्धति, सिद्धान्त, पहचान एवं नामकरण का अध्ययन इसके
    अन्तर्गत किया जाता है।
    वर्गीकरण पद्धति (Systematics) : जीवों के विकास क्रम में समानता एवं असमानताओं का अध्ययन।
    नामकरण (Nomenclature) : विश्वभर में प्रत्येक पादप का एक ही अन्तर्राष्ट्रीय नाम देने अर्थात् वनस्पतिक
    नामकरण करने के उद्देश्य से इंटरनेशनल कोड ऑफ बोटेनिकल नोमेनक्लेचर (International Code of BotanicalNomenclature, ICBN) स्थापित किया गया।

शैवाल का सामान्य परिचय (COMMON INTRODUCTION OF ALGAE)

शैवाल ऐसे थैलोफाइट्स (thallophytes) हैं,पादप जगत क्या है जिनमें क्लोरोफिल या पर्णहरिम युक्त (chlorophyllous) सरल एवं संवहन ऊतक रहित स्वपोषी (autotrophic) पादप सम्मिलित होते हैं। इनका शरीर स्पष्ट रूप से जड़, तने व पत्तियों में भिन्नित नहीं होता है। शैवाल एककोशिकीय से लेकर बहुकोशिकीय पौधों के रूप में प्रकृति में उपलब्ध होते हैं।

शैवालों के विशिष्ट लक्षण (Salient Features of Algae)

  • शैवाल आत्मपोषी (autotrophic) होते हैं। इनमें पर्णहरिम (chlorophyll) की उपस्थिति के कारण
    प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन का निर्माण होता है।
  • कुछ शैवाल परजीवी (parasitic) होते हैं, उदाहरण-
    चाय, कहवा एवं मेग्नोलिया (Magnolia) की पत्तियों में अन्तराकोशिकीय स्थानों में जीवन यापन करता है। यह
    सीफेल्यूरॉस वायरिसेन्स (Cephaleuros virescens) यह परजीवी चाय व कॉफी की पत्तियों में रेड रस्ट ऑफ टी (Red rust) नामक रोग उत्पन्न करता है।
  • अधिकांश शैवाल जलीय (aquatic) होते हैं, ये स्वच्छ जल/अलवणीय जल एवं समुद्री खारे जल में अर्थात् दोनों
  • में पाये जाते हैं। स्वच्छ जल में यूलोथ्रिक्स, स्पाइरोगायरा, क्लैमिडोमोनास तथा समुद्री जल में एक्टोकॉपर्स,
  • फ्यूकस एवं सारगासम आदि शैवाल पाये जाते हैं।
  • शैवालों का सूकाय या थैलस (thallus) वास्तविक ऊतकों से भिन्नता दर्शाता है। इस प्रकार के थैलस विषम
  • तंतुक (heterotrichous) कहलाते हैं। प्रक्षेपित तंत्र हरा व प्रकाश-संश्लेषी होता है।
  • कुछ शैवाल स्थलीय (terrestrial) होते हैं, उदाहरण- फ्रिश्चिएला। ये शैवाल गीली मिट्टी, पुराने भवनों की
  • दीवारों पर या गमले की बाहरी सतह पर उगते हैं।
  • कुछ शैवाल भिन्न/असामान्य आवासों पर पायी जाती हैं। ये शैवाल बर्फ पर भी उगती हैं। इनकी उपस्थिति से
  • बर्फ का रंग लाल दर्शित होता है, इसे लालचर्म/रेड स्नो (red snow) कहते हैं, उदाहरण— क्लैमिडोमोनास
  • निवेलिस (Chlamydomonas nivalis) व हीमेटोकोकस (Haematococcus) आदि।
  • कुछ शैवाल कवकों के साथ सहजीवन/सहजीविता (symbiosis) दर्शाती है, और लाइकेन्स (Lichens)
  • निर्मित करती हैं। यहाँ शैवालांश कवकों को भोजन उपलब्ध कराता है और कवकांश यांत्रिक सुरक्षा प्रदान करने के
  • साथ-साथ जल की आपूर्ति भी करता है।
  • शैवाल तंतु अशाखित (unbranched) एवं शाखित (branched) दोनों प्रकार के होते हैं। अशाखित
  • (unbranched) के अन्तर्गत यूलोथ्रिक्स एवं स्पाइरोगायरा तथा शाखित (branched) के अन्तर्गत क्लैडोफोरा,
  • एक्टोकार्पस सम्मिलित किये गये हैं।
  • शैवालों की कोशिका-भित्ति सेलूलोस (cellulose) की निर्मित होती है। सेलूलोस के अतिरिक्त कुछ शैवालों में
  • कोशिका भित्ति म्यूसिलेंज (mucilage), पेक्टिन (pectin) की निर्मित होती है।
  • शैवालों में तीनों प्रकार का जनन अर्थात् (i) कायिक जनन, (ii) अलिंगीय या अलैंगिक जनन एवं (iii) लिंगी या
  • लैंगिक जनन होता है।
  • शैवालों में कायिक जनन मुख्यतः निम्नवत् होता है-
  • (i) खण्डन द्वारा (By fragmentation) : उदाहरण- स्पाइरोगायरा, यूलोथ्रिक्स आदि।
  • (ii) मुकुलन द्वारा (By budding) : उदाहरण- प्रोटोसाइफॉन या ट्यूबर्स (tubers), जैसे— कारा आदि।
  • शैवालों में लैंगिक जनन के पश्चात भ्रूण (embryo) का निर्माण नहीं होता है।
  • शैवालों में युग्मकोद्भिद् (gametophyte) एवं बीजाणुद्भिद् (sporophyte) पीढ़ियाँ स्वतंत्र होती हैं।

BRYOPHYTES kya hai

समुदाय को वनस्पतिविज्ञ वनस्पति जगत का उभयचर या एम्फीबियन (amphibians of plant kingdom) कहते हैं। ये पौधे प्राय: छोटे होते हैं और विश्व के सभी भागों में विविध प्रकार की जलवायु में पाये जाते हैं

अर्थात् सर्वव्यापी (cosmopolitan) होते हैं। इनमें वास्तविक तना, पत्ती व जड़ें अनुपस्थित होती है। इनमें सत्य संवहन ऊतक (true vascular tissue) का अभाव होता है। वनस्पतिविज्ञों ने ब्रायोफाइटा को थैलोफाइटा (शैवाल एवं कवक) एवं टेरिडयोफाइटा के बीच रखा है।

यह पौधों का अपेक्षाकृत छोटा-सा समूह है। ब्रोयाफाइटा भ्रूण (embryo) निर्मित करने वाले पौधों, एम्ब्रियोफाइटा का सर्वाधिक साधारण एवं आद्य (primitive) समूह है। ये पौधे थैलोफाइटा (Thallophyta) समूह के पौधों से अधिक विकसित होते हैं।

ब्रायोफाइट्स (BRYOPHYTES) विशिष्ट लक्षण (Salient features)

ब्रायोफाइटा समूह के पौधों में निम्नवत् विशिष्ट लक्षण पाये जाते हैं-

  • ब्रायोफाइटा समूह के पौधे मुख्यतः स्थलीय होते है, नम भूमि, नम चट्टानों व नम दीवारों, छायादार स्थानों (damp places) पर मिलते हैं। कुछ ब्रायोफाइट्स जल में भी पाये जाते हैं।
  • कुछ ब्रायोफाइट्स, जैसे- मॉस, अधिपादप (epiphyte) के रूप में मिलते हैं।
  • कुछ ब्रायोफाइट्स (मॉस) मृतोपजीवी (saprophytic) होते हैं।
  • ब्रायोफाइट्स (मॉस) पौधे की मुख्य प्रावस्था युग्मकोद्भिद (gametophyte) होती है। यह स्वतंत्र एवं दीर्घजीवी
  • होती हैं।
  • ब्रायोफाइट्स की बीजाणुद्भिद प्रावस्था अल्पकालिक एवं युग्मकोद्भिद पर आश्रित होती है।
  • निम्न श्रेणी के ब्रायोफाइट्स में पादप शरीर थैलस (thallus) के समान होता है।
  • ब्रायोफाइट्स के जीवन चक्र में विषमरूपी प्रावस्थाएँ (heteromorphic stages) आकारिको लक्षणों में भिन्न होती है, इनमें नियमित रूप से पीढ़ी एकान्तरण (alternation of generation) होता है।
  • उच्च श्रेणी के ब्रायोफाइट्स में तने एवं पत्ती सदृश रचनाएँ मिलती हैं, उदाहरण— फ्यूनेरिया।

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