Cells Division kya hai | कोशिका विभाजन क्या है | ये 2 प्रकार से होते है

कोशिका विभाजन(CELL DIVISION)

कोशिका विभाजन (Cells Division kya hai)जीवन की निरंतरता का भौतिक आधार है। मातृ कोशिका से संतति कोशिकाओं के निर्माण को कोशिका -विभाजन (cell division) या कोशिका निर्माण (cell formation) कहते हैं। एक कोशिका का निर्माण पूर्ववर्ती/पैतृक कोशिका से होता है।

अतः एक कोशिका के विभाजन (Cells Division kya hai) से नयी कोशिका या संतति/पुत्री कोशिका का निर्माण (formation of new or daughter cell) ही कोशिका विभाजन (cell division) कहलाता है। एककोशिकीय जीवों में अलैंगिक जनन तथा बहुकोशिकीय जीवों में लैंगिक जनन, कोशिका विभाजन का ही परिणाम है।

कोशिका-चक्र की प्रावस्थाएँ (PHASES OF CELL CYCLE)

Cells Division kya hai. हॉवर्ड तथा पेले (Howard and Pele, 1953) ने कोशिका-चक्र की विभिन्न अवस्थाओं की खोज की। नियमित रूप से विभाजित होने वाली कोशिकाओं में कोशिका चक्र की अवधि (duration of cell cycle) 10 से 30 घंटे के बीज होती है। कोशिका-चक्र की तीन प्रावस्थाएँ होती हैं-

i) वृद्धि अवस्था या अन्तरावस्था (interphase), (ii) M-प्रावस्था या सूत्री विभाजन (mitotic division phase) एवं
(iii) कोशिका द्रव्य विभाजन (Cytokinesis)।

A. अन्तरावस्था या इंटरफेज (Interphase)

Cells Division kya hai | कोशिका विभाजन क्या है | ये 2 प्रकार से होते है

Cells Division kya hai… अन्तरावस्था, विश्राम प्रावस्था (resting stage) भी कहलाती है। यह दो कोशिका विभाजनों के बीच की अन्तराल अवधि है, जिसमें कोशिका (cell) विभाजन के लिए तैयार रहती है।

इस अवस्था में क्रमबद्ध तरीके से कोशिका वृद्धि व डी०एन०ए० का प्रतिकृतिकरण दोनों होते हैं गुणसूत्र लम्बे तथा महीन होते हैं और क्रोमेटिन जाल निर्मित करते हैं तथा केन्द्रक व कोशिकाद्रव्य दोनों में संश्लेषी व उपापचय क्रियाओं के फलस्वरूप कोशिकायें उन सभी पदार्थों का संग्रह एवं संश्लेषण करती हैं, जिनकी कोशिका विभाजन के समय आवश्यकता होती है।

अन्तरावस्था को तीन उपावस्थाओं में विभाजित किया गया है-

(i) पश्चसूत्री विभाजन अन्तरकाल प्रावस्था (G-1 sub phase or Post mitotic gap phase),

(ii) S-उपावस्था या डी०एन०ए० संश्लेषण प्रावस्था (S-sub phase or Period of DNA synthesis),

(iii) G-2 उपावस्था या पूर्व सूत्री विभाजन अन्तराल काल प्रावस्था (G-2 sub phase or Pre-mitotic phase) 1

1. पश्चसूत्री विभाजन अन्तरकाल प्रावस्था (Post mitotic gap phase : G-1 phase)

Cells Division kya hai…. कोशिका विभाजन द्वारा प्रत्येक संतति कोशिका के बनते ही इनकी G-1 प्रावस्था प्रारम्भ हो जाती है। इस प्रावस्था में प्रोटीन एवं RNA का संश्लेषण तथा DNA संश्लेषण के लिए आवश्यक विकरों (enzymes) का संश्लेषण एवं संग्रह होता है। इसके साथ-साथ DNA की नाइट्रोजनीय समाक्षारों (nitrogenous bases) का संश्लेषण एवं संग्रह होता है।

इस प्रावस्था में पूर्ण कोशिका विभाजन का 30 से 40 प्रतिशत समय (स्तनधारियों में लगभग 10 से 11 घंटे का समय) लगता है। गुणसूत्र लम्बे (extended), क्रोमेटिन तंतुओं के रूप में व पतले होते हैं, जो केन्द्रक में एक-दूसरे के ऊपर फैले रहते हैं। इस
क्रोमैटिन को यूक्रोमैटिन (euchromatin) कहते हैं, क्योंकि इसमें genes सक्रिय रहते हैं। क्रोमैटिन तंतुओं के कुछ भाग अधिक संघनित हो जाते हैं और 700nm मोटे हो जाते हैं।

इन भागों के जीन सक्रिय नहीं होते हैं, इसलिए इन संघनित भागों के क्रोमैटिन हिटरोक्रोमैटिन (heterochromatin) कहलाते हैं। G-1 प्रावस्था के अन्त में कोशिका या तो S-प्रावस्था में प्रवेश करती है या फिर अविभाजित रहने वाली G-0 प्रावस्था में प्रवेश करती है। G-0 अवस्था की अवधि कोशिका की प्रकृति पर आधारित होती है। कुछ कोशिकाएँ केवल कुछ निश्चित समयावधि तक तथा कुछ पूर्ण वयस्क जीवन तक
अविभाजित रहती है। G-0 अवस्था में ही कोशिकाओं में भिन्नन प्रारम्भ होता है।

2. S-उपावस्था या डी०एन०ए० संश्लेषण प्रावस्था (S-phase : DNA Synthesis phase)

Cells Division kya hai…. इस प्रावस्था में DNA का निर्माण एवं इसकी प्रतिकृति (replication) होती है। इस समय DNA की मात्रा दुगुनी हो जाती है साथ ही DNA. से सम्बन्धित हिस्टोन व नॉनहिस्टोन प्रोटीन (histone and non-histone  proteins) का संश्लेषण होने से क्रोमेटिन तंतु की दो प्रतियाँ बन जाती हैं।

जिन्हें युगल क्रोमेटिड (sister chromatids) कहते हैं। इस प्रावस्था में गुणसूत्रों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं होती। प्रत्येक गुणसूत्र के दोनों क्रोमेटिड्स (chromatids) एक केन्द्रमेल (centromere) से जुड़े रहते हैं। DNA प्रतिकृतिकरण के कारण केन्द्रक आकार में कुछ बड़ा हो जाता है। इस प्रावस्था में 30 से 50 प्रतिशत (लगभग 8 से 9 घंटे) का समय लगता है।

DNA संश्लेषण में कोई भी त्रुटि रह जाने पर DNA अणुओं की जाँच और संशोधन व सुधार S प्रावस्था में ही किया जाता है। यह काम भी DNA का द्विगुणन करने वाले एन्जाइम DNA पॉलीमरेज (DNA polymerase) व DNA लाइगेज एंजाइम (DNA ligase enzyme) ही करते हैं।

B. M-प्रावस्था या सूत्री विभाजन (M-Phase or Mitotic Phase)

यह G-2 प्रावस्था के बाद की प्रावस्था है। इसमें पूर्ण कोशिका चक्र का 5 से 10 प्रतिशत समय अर्थात् लगभग 1 घंटा लगता है। यह विभाजन समसूत्री (mitotic) या अर्धसूत्री (meiotic) हो सकता है। यह कोशिका के प्रकार पर निर्भर करता है। यदि विभाजित कोशिका कायिक कोशा (somatic cell) है,

तो समसूत्री विभाजन (mitosis) तथा यदि विभाजित होने वाली कोशिका जननिक कोशा (germinal cell) है तो विभाजन अर्धसूत्री (meiosis) होता है। केन्द्रक विभाजन (karyokinesis) तथा कोशाद्रव्य विभाजन (cytokinesis) भी इसमें सम्मिलित होते हैं। केन्द्रक विभाजन में पूर्वावस्था (prophase), मध्यावस्था (metaphase), पश्चावस्था (anaphase) तथा अन्त्यावस्था (telophase) होती है।

(समसूत्री विभाजन की प्रावस्थाएँ
(PHASE OF MITOTIC DIVISION)(कोशिका विभाजन क्या है)

1.सूत्री विभाजन या समसूत्री विभाजन

mitosis) की प्रक्रिया का पादप कोशिका (plant cellyebनिरीक्षण सर्वप्रथम स्ट्रासबर्गर (Strasburger), रॉबर्ट रिमैक (Robert Remake, 1841) तथा के. डब्ल्यू. वॉन नाय (K.W. Von Naegeli, 1842) ने किया। वॉल्थर फ्लेमिंग (W. Flemming) ने ही सन् 1879 में इस प्रक्रिया के माइटोसिस (mitosis; mito = सूत्र, osis = अवस्था) नाम दिया।

इसमें कोशिका के सभी घटकों का वृहद् पुनर्गठ होता है। इस प्रकार के विभाजन या समसूत्री विभाजन में जनक व संतति कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या बराबर है, इसलिए इसे सम विभाजन कहते हैं। अध्ययन की सुविधा के लिए समसूत्री विभाजन (mitosis) की प्रक्रिय (process) को दो भागों में विभाजित कर सकते हैं- (i) केन्द्रक विभाजन (karyokinesis), (ii) कोशिकाद्रव्य
विभाजन (cytokinesis ) )

1. केन्द्रक विभाजन (Karyokinesis)

Cells Division kya hai | कोशिका विभाजन क्या है | ये 2 प्रकार से होते है

केन्द्रक विभाजन की क्रिया में केन्द्रक दो भागों में विभाजित हो जाता है। यह क्रिया निम्न चार प्रमुख प्रावस्थाओं
विभाजित होती है-
(i) पूर्वावस्था (prophase), (ii) मध्यावस्था (metaphase), (iii) पश्चावस्था (anaphase), (iv)अन्त्यावस्य (telophase) ।

कोशिका चक्र एवं कोशिका विभाजन

1. पूर्वावस्था (Prophase) :

(i) प्रारम्भिक पूर्वावस्था (Early prophase)

यह समसूत्री विभाजन की प्रथम प्रावस्था होती है। इसमें क्रोमेंटिन जाल छोटे-छोटे कुण्डलित टुकड़ों में खुल जाता है, जिन्हें गुणसूत्र (chromosomes) कहते हैं। गुणसूत्र मोटे व संघनित होते हैं। गुणसूत्र दो सूत्रों के निर्मित होते हैं तथा एक-दूसरे से लिपटे रहते है, जिसे अर्धगुणसूत्र (chromatids) कहते है।

प्रत्येक गुणसूत्र के दोनों अर्धगुणसूत्र (chromatids) एक गुणसूत्र बिन्दु (centromere) पर आपस में जुड़े रहते हैं।
गुणसूत्र पर छोटी-छोटी कणिका सदृश रचनायें क्रोमोमीयर्स (chromomeres) स्थित होते हैं। इस अवस्था में केन्द्रक
झिल्ली (nuclear membrane) एवं केन्द्रिका (nucleolus) पाये जाते हैं।

(ii) मध्य पूर्वावस्था (Middle prophase) 

इस प्रावस्था में क्रोमेटिन जाल के विघटन के फलस्वरूप गुणसूत्र स्पष्ट दिखायी देने लगते हैं तथा दो भागों में लम्बवत विभाजित होने के कारण दोहरे (paired) हो जाते हैं। इस प्रावस्था में केन्द्रक झिल्ली (nuclear membrane) व केन्द्रिक (nucleolus) अस्पष्ट दिखायी देते हैं।

(iii) पश्च पूर्वावस्था (Late prophase)

इस प्रावस्था में गुणसूत्र अधिक संघनित (condensed) हो जाते हैं, जिस कारण प्रत्येक अर्धगुणसूत्र के चारों तरफ आच्छद/मैट्रिक्स (matrix) एकत्रित हो जाता है। केन्द्रक-झिल्ली एवं केन्द्रिका लगभग समाप्त हो जाते हैं तथा इस प्रावस्था के अन्त में गुणसूत्र मध्य रेखा की ओर बढ़ने लगते हैं।
हैं।)

2. मध्यावस्था (Metaphase)

यह पूर्वावस्था की अपेक्षाकृत छोटी प्रावस्था है। इसमें केन्द्रककला एवं केन्द्रिक पूर्णतः अदृश्य या विलोपित (disappear) हो जाते हैं। गुणसूत्र मध्य रेखा (equator plane) पर एकत्रित हो जाते हैं, तथा एक तर्कु (spindle) के रूप की आकृति बना लेते हैं,

जिसे केन्द्रकीय तर्क (nuclear spindle) कहते हैं। केन्द्रकीय तर्क के दोनों सिरे ध्रुव (poles) तथा मध्य तल मध्य रेखा (equator) कहलाते हैं। प्रत्येक अर्धगुणसूत्र के गुणसूत्र बिन्दु (centromere) से कुछ तंतु’ जिन्हें ट्रैक्टाइल तंतु (tractile fibre) कहते हैं, तर्क के सिरे पर स्थित ध्रुवों (poles) से जुड़े रहते हैं। तर्कु तंतु (spindle fibres) का निर्माण मुख्य रूप से टयूब्यूलिन प्रोटीन से बने।

माइक्रोट्यूब्यूल्स (microtubules) द्वारा होता है। इस प्रावस्था में गुणसूत्रों के गुणसूत्र बिंदु (centromere) मध्य रेखा की ओर एवं भुजाएँ (arms) प्रायः ध्रुवों की ओर होती हैं। कुछ तंतु एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक पूरी तरह फैले रहते हैं जिन्हें सहायक तंतु (supporting fibres) कहते हैं। कुछ तंतु तर्क में स्वतंत्र रूप से रहते हैं,

जिन्हें इन्टरजोनल तंतु (interzonal fibres) कहते हैं। कुछ समय पश्चात गुणसूत्र बिंदु के विभाजन के फलस्वरूप एक ही गुणसूत्र से उत्पन्न दोनों अर्धगुणसूत्र।एक-दूसरे से पृथक होने लगते हैं। गुणसूत्रों की संरचना एवं संख्या के अध्ययन के निमित्त मध्यावस्था अत्यधिक उपयुक्त प्रावस्था होती है।

3. पश्चावस्था (Anaphase)

यह समसूत्री विभाजन की अल्पावधि की प्रावस्था होती है। इस प्रावस्था में ट्रेक्टाइल तंतु (tractile fibre) सिकुड़ने लगते हैं जिसके कारण अर्धगुणसूत्र अलग होकर विपरित ध्रुवों के लगभग निकट पहुँच जाते हैं। इस समय अर्धगुणसूत्र अलग-अलग होकर U, V या L का आकार ले लेते हैं। सन्तति गुणसूत्रों (daughter chromosomes) का विपरीत ध्रुवों की ओर खिंचाव, इनके मध्य प्रतिकर्षण बल (repulsive force) के कारण होता है।

इस प्रकार इस प्रावस्था में आधे लम्बान अर्ध भाग अर्थात् अर्धगुणसूत्र (chromatids) या सन्तति गुणसूत्र (daughter chromosomes) तर्क के एक ध्रुव तथा बचे हुए आधे सन्तति गुणसूत्र विपरीत ध्रुव की ओर चले जाते हैं।

4. अन्त्यावस्था (Telophase) 

इस अवस्था में गुणसूत्र विपरीत ध्रुवों (opposite poles) पर पहुँचकर एकत्रित हो जाते हैं। तर्कु विलोपित (disappear) होने लगता है। सन्तति गुणसूत्रों के दोनों समूहों को घेरे हुए अलग-अलग केन्द्रक

2. द्वितीय अर्धसूत्री विभाजन या मिओसिस-(Meiosis-II)

द्वितीय अर्धसूत्री विभाजन समविभाजन (homeotypic) या मीओसिस-II कहलाता है। यह सूत्री विभाजन या
माइटोसिस के समान ही होता है। जिसमें संतति कोशिकाएँ गुणसूत्रों की संख्या में कोई परिवर्तन हुए बिना विभाजन
करती हैं। इस चरण में निम्नलिखित चार प्रावस्थायें होती हैं-

1. पूर्वावस्था द्वितीय (Prophase-II)

इस उपावस्था में केन्द्रिका तथा केन्द्रक आवरण विघटित हो जाते हैं। क्रोमेटिड सिकुड़कर छोटे व मोटे होने लगते
हैं। प्रत्येक गुणसूत्र के दोनों क्रोमेटिड लम्बाई में अलग-अलग हो जाते हैं तथा केवल सेन्ट्रोमीयर द्वारा जुड़े रहते हैं तथा मैट्रिक्स दिखायी देने लगता है। क्रोमेटिड इस प्रकार व्यवस्थित होते हैं कि उनके अक्ष (axis) प्रथम अर्धसूत्री विभाजन के तर्कु (spindle) के लम्बवत् स्थिर होते हैं।

2. मध्यावस्था द्वितीय (Metaphase-II)

गुणसूत्रों (chromosomes) के सेन्ट्रोमीयर दो भागों में विभक्त हो जाते हैं, परन्तु अलग नहीं होते। इस प्रकार
प्रत्येक गुणसूत्र के दोनों क्रोमेटिड केवल इन द्विगुणित सेन्ट्रोमीयर (diploid centromere) द्वारा जुड़े रहते हैं। तर्कु (spindle) का निर्माण हो जाता है और गुणसूत्र तर्क की मध्य रेखा (equator) पर सेन्ट्रोमीयर द्वारा चिपक जाते हैं।

3. पश्चावस्था द्वितीय (Anaphase-II)

सेन्ट्रोमीयर पूरी तरह विभाजित हो जाते हैं, फलस्वरूप प्रत्येक गुणसूत्र के दोनों क्रोमेटिड पूरी तरह से एक-दूसरे से
अलग हो जाते हैं। ये पृथक क्रोमेटिड जो कि अब स्वतन्त्र रूप से गुणसूत्र बन जाते हैं, तर्कु तंतुओं (spindle fibres)
द्वारा विपरीत ध्रुवों की ओर खींच लिए जाते हैं। इस प्रकार गुणसूत्रों के दो अलग-अलग समूह बन जाते हैं।

4. अन्त्यावस्था द्वितीय (Telophase-II)

गुणसूत्रों के दोनों समूहों के चारों ओर केन्द्रक आवरण पुनः बन जाता है। केन्द्रिका का भी पुनः निर्माण हो जाता
है। गुणसूत्र अकुण्डलित हो जाते हैं। केन्द्रक विभाजन के पश्चात कोशिकाद्रव्य का विभाजन (cytokinasis) होता है।

इस प्रकार अर्धसूत्री विभाजन के फलस्वरूप एक जनक कोशिका से चार संतति कोशिकायें बनती हैं जिनके अन्दर
गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिकाओं की तुलना में आधी होती है। यही नहीं, चारों संतति कोशिकाओं के लक्षण एक
दूसरे से तथा जनक कोशिका से भिन्न होते हैं।

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