माइट्रोकांड्रिया या सूत्र कणिका किसे कहते हैं | mitrochondria kise kahate Hain

माइट्रोकांड्रिया या सूत्र कणिका किसे कहते हैं ( mitochondria and Sutra Kanika)

माइट्रोकांड्रिया या सूत्र कणिका किसे कहते हैं माइक्रो कंडिया की खोज सर्वप्रथम 1849 में कोलिकर वैज्ञानिक ने कीटों की रेखिक पेशियों में की फ्लेमिंग ने 1882 के अनुसार यह एक धागे नुमा संरचना है जबकि अल्टरमैन 1990 के अनुसार यह एक दानेदार होती है।

उन्होंने ऐसे बायोप्लास्ट नाम दिया सन 1897 में सी वेंदा ने माइट्रोकांड्रिया नाम दिया कोशिका में उपस्थित सभी माइक्रोकोनिडिया को सम्मिलित रूप से कुंडली सॉन्ग कहते हैं पादपों में इसकी खोज 1904 में निमेष नामक वैज्ञानिक ने निंबा नामक पौधे में की।

बनसले और होईर ने 1934 में यकृत की कोशिकाओं से माइटोकॉन्ड्रिया को पृथक किया माई कैलिस ने बताया कि माइटोकॉन्ड्रया की श्वसन में महत्वपूर्ण भूमिका होती है सन 1948 में हुए ने बताया कि कोशिका मैं श्वसन क्रिया भी होती है।

माइट्रोकांड्रिया का आकार कैसा होता है

माइट्रोकांड्रिया का आकार यह एक गोलाकार और अंडाकार होती है कभी-कभी एक ही कोशिका में भिन्न प्रकार की माइटोकॉन्ड्रिया पाई जाती हैं इसकी औसत लंबाई 3 से 5 मिनी माइक्रोम तथा औसत व्यास 0.5 से 1.0 मिनी माइक्रोम तक होता है। समानत एक कोशिका में इनकी संख्या 200 से 300 तक होती है।

माइट्रोकांडया की संरचना कैसी होती है

माइक्रो कंडिया चारों ओर से दूर एकक कला से निर्मित संरचना होती है बाय झिल्ली यह माइट्रोकांड्रिया का वातावरण बनाती है या है झिल्ली चिकनी होती है यह है बाय कला के अंदर स्थित होती है बाय कला तथा भीतरी कला के मध्य 6 से 8 नैनोमीटर रिक्त स्थान होता है।

जिसे पेरी माइट्रोकांड्रिया अवकाश कहते हैं अंतर पालित होकर अनेक उंगली नोमा ऊभार का निर्माण करती है जिसे दृष्टि कहते हैं आंतरिक कला से बने कक्ष के भीतर एक सामान्य सा पदार्थ भरा होता है जिसे मैट्रिक्स आधार धर्म कहते हैं यह एक जेली सामान संरचना है जिसे लिपट प्रोटीन माइक्रो कडिया डीएनए कैल्शियम तथा मैग्निशियम आयन 70s राइबोसोम तथा अन्य कण होते हैं।

कृष्टि एंजाइम अभिक्रियाएं के लिए माइट्रोकांड्रिया के लिए माइट्रोकांड्रया के क्षेत्र को बढ़ाते हैं कृष्टि पर वेदांत युक्त टेनिस के रैकेट के आकार के सूक्ष्म कर पाए जाते हैं जिसे प्रारंभिक का नया ऑक्सीसोम भी कहते हैं इनकी खोज सन 1962 में पैराडाइज मोरान ने की थी।

ऑक्सी सोम का शीर्ष जिस उपिकाई कहते हैं सो एनईस्टा होता है इसके आधार पर संग लगन अनंत जैसे संरचना को ऑफ इकाई भी कहते हैं इसी आधार भाग से यह एक कृष्टि पर जुड़े होते हैं इनॉक्सी सोम में एंड ओसेन ड्राइव फास्टपेड (ATP) कहते हैं जो एटीपी संश्लेषण में सहायक होते हैं माइट्रोकांड्रिया की आंतरिक सतह पर जो एंजाइम सहकर के रूप में इलेक्ट्रॉन बाहर हूं भी पाए जाते हैं जो इलेक्ट्रॉन स्नान अंतर श्रंखला मैं भाग लेते हैं।

माइक्रो कोंडिया के में 70s प्रकार की राइबोसोम होते हैं जो प्रोटीन संश्लेषण में भाग लेते हैं इसके अतिरिक्त माइट्रोकांड्रिया में दोउगुर डीएनए (DNA) पाया जाता है जिससे वह प्रति करण की क्षमता होती है इस विशेषता को अनुवांशिक कहते हैं इसलिए इसे कोशिका के अंदर कोशिका भी कहते हैं।

माइट्रोकांड्रिया के कार्य

माइक्रो कंडिया के कार्य निम्न रूप से संपन्न होते हैं।

1. माइट्रोकांड्रिय में कार्बोहाइड्रेट तथा वसा युक्त खाद्य पदार्थों का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है इन पदार्थों के जैव रासायनिक ऑक्सीकरण के फल स्वरुप मुक्त ऊर्जा एटीपी के रूप में संक्षिप्त हो जाते हैं एटीपी को अपाचे जगत का सिक्का और माइटोकॉन्ड्रया को कोशिका का ऊर्जा ग्रह कहा जाता है।

2. माइट्रोकांड्रिया के अंतः कक्ष में बस गए हम लोग के संश्लेषण के लिए आवश्यक एंजाइम पाए जाते हैं जो वसीय अम्लों की लंबी श्रंखला के निर्माण में सहायक होते हैं।

3. पायरोटेक अम्ल का ऐसी ट्रिक कोएंजाइम (CO एंजाइम A) मैं परिवर्तन परी माइट्रोकांड्रया स्थान में होता है एसिटेक कोएंजाइम ए ग्लाइकोलाइसिस तथा क्रेब्स चक्र के मध्य संयोजी गरी के रूप में कार्य करता है।

कोशिका क्या है

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