NucleicAcid kya hai | न्यूक्लीक अम्ल क्या है | 2 प्रकार के न्यूक्लीक अम्ल है

न्यूक्लीक अम्ल क्या है (NucleicAcid kya hai)

NucleicAcid kya hai डी०एन०ए० एवं आर०एन०ए०, दोनों न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लिओटाइड नामक इकाइयों के बहुलक होते हैं न्यूक्लिओटाइड्स फॉस्फोडाइएस्टर बंध द्वारा परस्पर जुड़े रहते हैं। प्रत्येक न्यूक्लिओटाइड अणु एक नाइट्रोजन समाक्षार (nitrogen base), एक पेन्टोस शर्करा (pentose sugar) तथा एक फॉस्फेट समूह (phosphate group) का यौगिक होता है।

RNA के अणु में केवल एक तथा DNA के अणु में परस्पर गुंथी हुई पॉलीन्यूक्लिओटाइड्स (polynucleotides) की दो श्रृंखलाएँ होती हैं। डी०एन०ए० अणुओं में, जीवों की वृद्धि जनन एवं आनुवंशिक प्रक्रियाओं की सूचना एवं निर्देश अंकित होते हैं। डी०एन०ए० की पुनरावृत्ति (replication) कोशिका विभाजन के समय होती है,

बराबर मात्रा संतति कोशिका में बँट जाती है। समसूत्री व अर्द्धसूत्री विभाजन के द्वारा कोशिकाओं की अर्जित सभी सूचनाएँ एक कोशिका से दूसरी कोशिका में पहुँच जाती हैं।

2 प्रकार के न्यूक्लीक अम्ल है (NucleicAcid kya hai)

NucleicAcid kya hai | न्यूक्लीक अम्ल क्या है | 2 प्रकार के न्यूक्लीक अम्ल है

डीऑक्सीराइबोज न्यूक्लिक अम्ल, डी०एन०ए० (Deoxyribose Nucleic Acid, DNA)

NucleicAcid kya hai डीऑक्सीराइबोज न्यूक्लिक अम्ल डीऑक्सीराइबोज शर्करा, फॉस्फेट तथा प्यूरीन एवं पायरिमिडीन क्षारकों से निर्मित न्यूक्लिओटाइड्स इकाइयों के बहुलक (polymer) हैं। डी.एन.ए. के प्यूरीन क्षारक- एडीनीन एवं ग्वानीन तथापायरिमिडीन क्षारक थायमीन एवं साइटोसीन होते हैं। यें चार नाइट्रोजनी क्षारक सामान्यतः पाये जाते हैं

किन्तु कुछजन्तुओं एवं पादपों में अपवाद के रूप में कुछ अन्य क्षारक भी मिलते हैं, जैसे- 5-मिथाइल साइटोसीन, कुछ वाइरसएवं बैक्टिरिया में, 6-मिथाइल ऐमीनो प्यूरीन तथा थायमीन क्षारक के स्थान पर 5-हाइड्रोक्सी मिथाइल यूरेसिल मिलता है। DNA की द्विकुण्डलित संरचना (Double helical structure of DNA) समय-समय पर वैज्ञानिकों ने डी०एन०ए० की संरचना अर्थात् डी०एन०ए० में क्षारकों का क्रम निर्धारित करने के निमित्त परिकल्पनाएँ प्रस्तुत की।

सर्वप्रथम विलकिन्स द्वारा एक्स-रे तकनीक (Wilkins X-ray technique) के परिणामों से यह मान्यता हुई कि डी०एन०ए० एक द्विकुण्डलित संरचना (double helical structure) है।उपरोक्त के आधार पर वाटसन एवं क्रिक (Watson and Crick, 1953) ने डी०एन०ए० की विस्तृत संरचना काप्रारूप प्रस्तुत किया। नोट इस शोधकार्य के लिए विलकिन्स एवं वाटसन व क्रिक को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।डी०एन०ए० की संरचना का प्रारूप निम्नवत है-

1. पॉलीन्यूक्लिओटाइड्स की दो शृंखलाओं से डी०एन०ए० का निर्माण होता है। पॉलीन्यूक्लिओटाइड्स की दोनों शृंखलाएँ एक सामान्य अक्ष पर दाहिने हाथ की ओर से कुण्डलित होती हैं। इस प्रकार ये डी०एन०ए० रज्जुकी अनुदैर्ध्य निर्मित करती हैं।

2. प्रत्येक न्यूक्लिओटाइड्स शृंखला की प्रत्येक न्यूक्लीओटाइड इकाई तीन प्रमुख घटकों- शर्करा, फॉस्फोरिक अम्ल एवं नाइट्रोजनी क्षारक (प्यूरीन एवं पिरिमिडीन्स) द्वारा बनी होती है।

3. फॉस्फोएस्टर बंध द्वारा प्रत्येक पॉलीन्यूक्लिओटाइड शृंखला के निकटवर्ती न्यूक्लिओटाइड सम्बद्ध रहते हैं।

4. फॉस्फोएस्टर बंध एक न्यूक्लिओटाइड इकाई की शर्करा के 5′-कार्बन व दूसरी न्यूक्लिओटाइड इकाई की शर्कराके 3′-कार्बन के मध्य होता है।

5. विपरीत दिशाओं में दोनों पॉलीन्यूक्लिओटाइड्स की श्रृंखलाएँ विन्यासित रहती हैं। ये श्रृंखलाएँ प्रतिसमानान्तर(antiparallel) होती हैं, अर्थात् एक शृंखला में शर्करा के कार्बन 3’5‘ दिशा में तथा दूसरी श्रृंखला में कार्बन 5′ → 3‘ दिशा में होते हैं।

6. दोनों पॉलीन्यूक्लिओटाइड शृंखलओं के नाइट्रोजनी क्षारक एक-दूसरे के पूरक होते हैं, अर्थात् एक श्रृंखला मेंयदि एडीनीन क्षारक होता है तो दूसरी शृंखला में उसके सामने थायमीन क्षारक होता है, इसी क्रम में दूसरी शृंखला के ग्वानीन के सामने साइटोसीन क्षारक स्थित होता है। इस प्रकार दोनों शृंखलाएँ एक-दूसरे की पूरक होती हैं। इसके अन्तर्गत एक श्रृंखला के क्षारकों का क्रम यदि A — T— C– G—A – T C– G है तो दूसरी शृंखला में क्षारकों का क्रम T-A-G-C-T – A G-Cही होगा।

7. हाइड्रोजन बंध द्वारा दोनों न्यूक्लिओटाइड शृंखला परस्पर एक-दूसरे के साथ सम्बद्ध रहती हैं। दो पूरक क्षारकयुग्मों के मध्य हाइड्रोजन बंध होते हैं। सामान्यतः एडीनीन व थायमीन के मध्य दो तथा ग्वानीन व साइटोसीन के मध्य तीन हाइड्रोजन बंध स्थित होते हैं।

राइबोज न्यूक्लिक अम्ल(RIBOSE NUCLEIC ACID, RNA)

NucleicAcid kya hai राइबोज न्यूक्लिक अम्ल (RNA) एकरज्जुकी (single stranded) अणु हैं। जीवित कोशिकाओं के केन्द्रक एवंकोशिकाद्रव्य में ये पाये जाते हैं। इनका निर्माण भी न्यूक्लिओटाइड इकाइयों द्वारा होता है, जो शर्करा, नाइट्रोजनी क्षारक (प्यूरीन एवं पिरिमिडिन्स) एवं फॉस्फोरिक अम्ल द्वारा निर्मित होता है। राइबोज न्यूक्लिक अम्ल, डी०एन०ए० की तरह न्यूक्लिओटाइड्स के बहुलक (polymer) हैं, किन्तु ये डी०एन०ए० के न्यूक्लिओटाइड्स से दो लक्षणों में अलग होते हैं

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