RNA kya hai RNA क्या है | RNA के 3 प्रकार

RNA kya hai

RNA kya hai नमस्कार साथियों आज की इस पोस्ट में हम आपको बताना चाहते हैं। कि आ रहे हैं क्या है और आरएनए के प्रकार का यह जानते हैं आज की इस पोस्ट में।

RNA केंद्रक में उत्पन्न होकर कोशिका धर्म में आ जाते हैं। एक केंद्रक से सूचना लेकर राइबोसोम को देते हैं। जिनसे राइबोसोम पर प्रोटीन संश्लेषण होता है एक केवल एक श्रंखला के बने होते हैं।

जिसे पॉली राइबोन्यूक्लियोटाइड श्रंखला कहते हैं। ए राइबोसोम शर्करा युक्त न्यूक्लियोटाइड की बनी होती हैं। इसमें इसमे A,G,C,U नामक नाइट्रोजन चालक पाए जाते हैं। कुछ विचारों में अनुवांशिक पदार्थ के रूप में काम करते हैं।

RNA kya hai  RNA क्या है | RNA के प्रकार
RNA kya hai RNA क्या है | RNA के प्रकार

RNA के प्रकार

कार्य के आधार पर प्रत्येक कोशिका में आर्य ने निम्न प्रकार के होते हैं।

  1. M(RNA) संदेशवाहक या दूत (RNA)
  1. R(RNA) राइबोसोमल (RNA)
  1. T(RNA) स्थानांतरण या घुलनशील या योजक (RNA)

M(RNA) संदेशवाहक या दूत (RNA)

M-RNA kya hai

इसका प्रमुख कारण केंद्र में उपस्थित डीएनए से अनुलिपि करण द्वारा सूचनाओं को (codon) को डॉन के रूप में राइबोसोम पर ले जाने का कारण होता है यह कोशिका के कुल RNA का 3 से 5% तक होता है।

इसका आंबिक भार 5 से 2000000 डाल्टन होता है प्रत्येक प्रकार के प्रोटीन के लिए एक विशेष MRNA होता हैं। जेबक और मोनोडऑन ने सन 1961 में इन्होंने इसको MRNA नाम दिया।

R(RNA) राइबोसोमल RNA

एएसएन अनु होते हैं। जो उन सभी कोशिका में पाए जाने वाले राइबोसोम नामक कोशिका अंगों का निर्माण करते हैं। एम प्रोटीन और उनके साथ जोड़कर राइबोसोम की इकाई का निर्माण करते हैं।

राइबोसोम उन स्थानों पर कार्य करते हैं। जिन पर प्रोटोन की पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाओं का संश्लेषण होता है। इसी कारण कोशिकाओं में राइबोसोम की संख्या सबसे अधिक होती है। यह कोशिका के कॉल आर एन ए का प्रतिशत होता है। इसका अनुभव 40 से 10 लाख तक होता है।

T(RNA) स्थानांतरण या घुलनशील या योजक (RNA)

इसका संश्लेषण केंद्रक में DNA के अनुलिपि करण द्वारा होता है। जहां से कोशिकांग उत्तर में आ जाता है। इसे RNA में T;A;U तथा G;C का अनुपात लगभग 1 होती है। TRNA अनु कोशिका द्रव में उपस्थित अमीनो अम्ल के आरोपों को राइबोसोम तक ले जाते हैं।

वहां पर लगे M(RNA) पर यथा स्थान जोड़कर अमीनो पॉलिपेप्टाइड श्रंखला में निश्चित क्रम में जोड़े जाते हैं। और कार्य पूरा हो जाने के बाद कोशिका धर्म में वापस आकर पुनः अपने कार्य की पुनरावृत्ति करते हैं।

सबसे छोटे अनु होने के कारण एक कोशिका द्रव्य में खुले रहते हैं।इसलिए इन्हें घुलनशील भी कहते हैं यह RNA का 10 से 20 परसेंट तक होते हैं। इनका अणु भार 25 से 30,000 तक होता है। यह लगभग 70 से 75 निकलो टाइट के बने होते हैं।

T(RNA) का क्लोवर मॉडल

T(RNA) की पॉलिन्यूक्लियोटाइड श्रंखला कई स्थानों पर वाले तैसी विशेष प्रकार की त्रिविम्व आकृति बनाते हैं। जिसमें चार स्पष्ट दो ही कुंडला कार भुजाएं होती है। इसकी संरचना के लिए रॉबर्ट होली ने सन 1964 में क्लोवरलीफ मॉडल प्रस्तुत किया है।

इनके अनुसार डीआरएनए की चार भुजाएं में से तीन भुजाएं के शिरे लुप के समान होते हैं। सभी टी आरएनए T(RNA) और की चारों भुजाएं एक जैसी होती हैं। जो दो विपरीत दिशाओं में स्थित होती हैं। जो निम्न हैं

1 अंगीकार या ग्राही भुजा (Acceptor Aum)

इस भुजा को अमीनो अम्ल भुजा भी कहते हैं। यह समझा के शरीर पर लूट नहीं होता है। बल्कि भजन दो ही कुंडली का एक सूत्र 5 शिरे बाला तथा दूसरा 3 शिरे वाला होता है। 3 शिरे वाले सूत्र के शिरे पर सैटोसीन-सैटोसीन-एसेनिन चारकोप वाले राइबोन्यूक्लियोटाइड से बना अंतिम को डॉन होता है। कोई एक विशेष अमीनो अम्ल ए के दो या तीन कार्बन से जुड़ जाता है।

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